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उत्तराखंड के इस डैम में पड़ी दरारे,बड़े पैमाने पर हो रहा पानी का रिसाव, डीएसआरपी की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

22 Sep 2022 | doonprimenews
उत्तराखंड के इस डैम में पड़ी दरारे बड़े पैमाने पर हो रहा पानी का रिसाव  डीएसआरपी की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
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उत्तराखंड में एक डैम में बड़े पैमाने पर पानी का रिसाव हो रहा है। जी हाँ बता दें की एक रिपोर्ट में खुलासे के बाद विभाग अब इस डैम की मरम्मत की बात कर रहा है। नैनीताल जिले के भीमताल डैम से बड़े पैमाने पर पानी का रिसाव हो रहा है। डैम में दरारें भी पड़ रही हैं। केंद्रीय स्तर पर गठित टीम डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल (डीएसआरपी) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। कमेटी ने सिंचाई विभाग को डैम का सेसमिक रफ्रिेक्शन टोमोग्राफी (एसआरटी) टेस्ट करवाने के निर्देश दिए हैं।

पैनल ने एसआरटी जाँच के दिए आदेश
बता दें की बांध की सुरक्षा के लिए हर 4-5 साल में डीएसआरपी डैम का निरीक्षण करता है। इसी के अनुसार छह सदस्यों ने पिछले साल दिसंबर में भीमताल डैम का निरीक्षण किया था। हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट में पता चला है कि डैम से काफी मात्रा में पानी का रिसाव हो रहा है। इसलिए मरम्मत की जरूरत है।पैनल ने डैम की फाउंडेशन की स्टडी और पानी के रिसाव की जानकारी के लिए एसआरटी जांच करवाने के निर्देश सिंचाई विभाग को दिए हैं। इससे साफ हो पाएगा कि झील से रोजाना कितना पानी रिस रहा है। डैम के कमजोर हो रहे हिस्सों की भी जानकारी मिल सकेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर डैम की मरम्मत का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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डेढ़ सौ साल का होने जा रहा है डैम
आपको बता दें की भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो सीसी पंत का कहना है की भीमताल डैम करीब डेढ़ सौ साल का होने जा रहा है। ऐसे में अगर कोई बड़ा भूकंप या कोई आपदा आई तो इस बात को लेकर आशंका है कि यह डैम उसे झेल पाएगा या नहीं? ऐसे में हल्द्वानी के साथ ही तराई के बड़े इलाके के लिए खतरा बढ़ जाता है।

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महारानी विक्टोरिया के नाम पर रखा गया था डैम का नाम
भीमताल डैम का निर्माण अंग्रेजी शासनकाल में 1880 में हुआ था। अंग्रेजों ने इसकी उम्र सौ साल तय की थी। उड़द की दाल व चूने के साथ पत्थरों को जोड़कर डैम बना था। इंग्लैंड की महारानी क्वीन विक्टोरिया के नाम पर इसका नाम विक्टोरिया भीमताल डैम रखा गया।भीमताल बांध में समय के साथ कुछ तकनीकी चुनौतियां आ रही हैं। मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
एके वर्मा, ईई, सिंचाई विभाग व सदस्य रिव्यू पैनल

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